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समस्तीपुर में नेटवर्क मार्केटिंग के नाम पर फंसाए गए 105 लोग मुक्त, पुलिस ने 5 आरोपियों को दबोचा

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समस्तीपुर में नेटवर्क मार्केटिंग के नाम पर जबरन काम कराने के मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 105 लोगों को मुक्त कराया। मामले में पांच आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है।

समस्तीपुर/आलम की खबर:समस्तीपुर जिले में नेटवर्क मार्केटिंग के नाम पर लोगों को फंसाकर जबरन काम कराने के आरोप में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने मुफस्सिल थाना क्षेत्र के अंतर्गत चल रहे एक कथित नेटवर्क मार्केटिंग सेटअप पर छापेमारी कर कुल 105 लोगों को मुक्त कराया है। पुलिस के अनुसार इन लोगों को नौकरी दिलाने का झांसा देकर लाया गया था और बाद में नेटवर्क मार्केटिंग का काम करने के लिए दबाव बनाया जा रहा था।

मामला Lead Vision Trading Indian Private Limited से जुड़ा बताया जा रहा है, जो Galway के नाम से नेटवर्क मार्केटिंग गतिविधियां संचालित कर रही थी। पुलिस को सूचना मिली थी कि समस्तीपुर जिले में कुछ स्थानों पर युवाओं को नौकरी का लालच देकर बुलाया जा रहा है और उनसे उनकी इच्छा के विरुद्ध काम कराया जा रहा है। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और प्रारंभिक जांच में शिकायतों को सही पाया गया।

पुलिस अधीक्षक समस्तीपुर के निर्देश पर साइबर क्राइम डीएसपी के नेतृत्व में विशेष टीम का गठन किया गया। टीम ने मुफस्सिल थाना क्षेत्र के दूधपुरा और मुसापुर इलाके में स्थित संबंधित स्थानों की निगरानी की। इसके बाद पुलिस टीम ने योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी अभियान चलाया।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने वहां मौजूद 105 लोगों को मुक्त कराया। इनमें 67 युवक और 39 युवतियां शामिल थीं। पुलिस के अनुसार मुक्त कराए गए लोगों में कई नाबालिग भी पाए गए हैं। जांच में यह भी सामने आया कि इनमें बिहार के अलावा असम और पश्चिम बंगाल के लोग भी शामिल थे।

पुलिस का कहना है कि इन लोगों को रोजगार और सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा देकर बुलाया गया था। इसके बाद उन्हें एक जगह रखकर नेटवर्क मार्केटिंग का कार्य करने के लिए दबाव बनाया जा रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मानवाधिकार आयोग से मिले निर्देश के बाद भी कार्रवाई को आगे बढ़ाया।

इस पूरे मामले में मुफस्सिल थाना में प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ बाल एवं किशोर श्रम कानून के तहत भी कार्रवाई की है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस नेटवर्क से कितने लोग जुड़े हुए हैं और इसके पीछे किसी बड़े गिरोह की भूमिका तो नहीं है।

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में दरभंगा, असम और बिहार के अलग-अलग जिलों के लोग शामिल बताए गए हैं। पुलिस गिरफ्तार लोगों से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है।

समस्तीपुर पुलिस की इस कार्रवाई को युवाओं को नौकरी के नाम पर ठगी और जबरन श्रम जैसी गतिविधियों से बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संस्था या कंपनी में नौकरी के नाम पर जाने से पहले उसकी पूरी जानकारी जरूर प्राप्त करें।

विशेषज्ञों के अनुसार आजकल ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से रोजगार का लालच देकर युवाओं को जाल में फंसाने के मामले बढ़ रहे हैं। ऐसे मामलों में युवाओं को किसी भी कंपनी में शामिल होने से पहले उसके पंजीकरण, काम करने के तरीके और कानूनी स्थिति की जांच करनी चाहिए।

समस्तीपुर पुलिस की टीम अब मुक्त कराए गए सभी लोगों के बयान दर्ज कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इन लोगों को यहां तक कैसे लाया गया और इस पूरे नेटवर्क में कितने लोग सक्रिय हैं।

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नौकरी के सपने के पीछे छिपे जाल से युवाओं को बचाने की जरूरत

रोजगार की तलाश में युवा अक्सर ऐसे लोगों के निशाने पर आ जाते हैं जो बेहतर भविष्य और अच्छी नौकरी का सपना दिखाकर उन्हें गलत रास्ते पर ले जाते हैं। समस्तीपुर में नेटवर्क मार्केटिंग के नाम पर 105 लोगों को मुक्त कराने की पुलिस कार्रवाई इसी गंभीर समस्या की ओर संकेत करती है।

युवाओं को नौकरी के नाम पर बुलाना, फिर उनकी स्वतंत्रता सीमित करना और दबाव में काम करवाना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता। ऐसे मामलों में केवल पुलिस कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज में जागरूकता भी जरूरी है।

परिवारों को भी अपने बच्चों के रोजगार संबंधी फैसलों पर नजर रखनी चाहिए। किसी अनजान संस्था के माध्यम से नौकरी मिलने की जानकारी मिलने पर उसकी सत्यता जांचना बेहद जरूरी है।

समस्तीपुर पुलिस की कार्रवाई ने एक बड़े सवाल को सामने रखा है कि रोजगार के नाम पर चलने वाले ऐसे नेटवर्क की पहचान समय रहते कैसे की जाए। प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी है कि युवाओं को सुरक्षित रोजगार के अवसर उपलब्ध हों और धोखाधड़ी करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो।

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